वक्त की भी अजीब कशमकश है
की वो है तो हम नही और
जो आज हम है तो उनका निशाँ गुम है
वक्त की भी अजीब कशमकश है
जानता है दीवाना दिल की वो नही है इसकी मंजिल
फिर भी उसी रह पर चलने का शौकीन है
वक्त की भी अजीब कशमकश है
न कोई गिला न शिकवा है उनसे
की वो तो हाले - दिल से बेखबर है
वक्त की भी अजीब कशमकश है
वो सादगी में बिता गए हजारो लम्हे
हर पल में मानो ज़िन्दगी जी ली हो हमने
वक्त की भी अजीब कशमकश है
मूँद ली थी आँखें हमने तो उनके इंतज़ार में
पर दगाबाज़ सांसें बह रही है उनकी यादों के भंवर में
वक्त की भी अजीब कशमकश है
न हो सके हम उनके फिर भी है इक तस्सल्ली
की होगा मिलन रूह का रूह से अगले जहान में
वक्त की भी अजीब कशमकश है...
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
नजाने क्यों
नजाने क्यों, सब को सब कुछ पाने की होड़ लगी है नजाने क्यों, सब को सबसे आगे निकलने की होड़ लगी है जो मिल गया है, उसको अनदेखा कर दिया है और जो...
-
चले आए हैं तेरे दर पे कि आज जाने कि जल्दी नहीं किसी कि नजरों का इंतज़ार बनें कि आज हमारे घर कोई नहीं हैं भटक राहों में दर बदर रहें कि ...
-
सर्दियों की मखमली धूप से भी ज्यादा कोमल है तेरी यादों का स्पर्श तेरे साथ बीता मेरा हर पल, मादक है कहतें है मदहोशी की बातें ज़हन में नहीं ...
-
आज अचानक कहीं गहरे अंतस में उसी मंदिर कि घंटियाँ फिर से बजने लगी हैं और आरती सुनाई देने लगी है जब मैं और मेरी सहेलियाँ छुट्टी वाले द...
4 comments:
वक्त की भी अजीब कशमकश है
की वो है तो हम नही और
जो आज हम है तो उनका निशाँ गुम है
वक्त की भी अजीब कशमकश है
bahut khub prerna ji. badhai
bahut badia hai aur sach hai.....
मूल्यवान विचार एवं अभिव्यक्ति ..धन्यवाद ..
सुन्दर विचारों में,दर्द को पिरोया है आप ने.
Post a Comment