Friday, September 15, 2023
क्या मैं आज़ाद हूँ
Tuesday, September 12, 2023
विरासत
ना कुछ मेरा है, ना कुछ तेरा है
बस जो है, वो यहीं से लिया है
और यहीं पर देना है
तो फिर किस बात का अभिमान है, झूठी शान है और नकली इंसान है
भौतिक सुखों की अभिलाषा से क्या होगा
होना तो वही है जो माथे पे लिखा होगा
तू कर्म भूमि के पथ पर
कर्म करता चल निरन्तर
तू ठहर मत, तू रुक मत, तू झुक मत, तू थक मत, तू डर मत, तू सोच मत
तू अपने मार्ग पर उद्दंड चलता चल
कल क्या होगा, ये तू कल पर छोड़ दे
तू तो बस आज का गीत गुनगुनाता चल
और यदि कुछ संचय करना ही है
तो ऐसी जागीर का कर
जो अनमोल है, अविकारी है, अमर है
जो मर कर भी साथ जानी है
और जो सदा सर्वदा साथ रहनी है
वो वही है
जो पार्वती का शिव है
जो मीरा का कृष्ण है
जो लक्ष्मी का गणेश है
जो सीता का राम है
और जो राधा का श्याम है
वही तो हमारा भी असली धाम है
तो क्यों न आज से अभी से
कुछ ऐसा कायदा कायम करें
की अबकी बार जो जाएं
तो फिर बहुरी वापिस ना आएं
डॉ त्रिपत मेहता
Tuesday, August 22, 2023
फ़िल्हाल जी ले
Saturday, May 13, 2017
सिसकते रिश्ते
कि शाखों से टूटे पत्ते
फिर से उन्ही टहनियों पर
लहरा पाते
काश की ऐसा होता
कि टूटे हुए तारे
फिर से विशाल आकाश में
जगमगा पाते
काश की ऐसा होता
कि रिश्तों के टूटे हुए तार
फिर से अपने सांचे में ढल पाते
खिलखिला पाते
काश....
मगर ये हो न पाएगा
वक़्त का पहिया तो चलता ही
चला जाएगा
और अच्छा है की न हो पाएगा
गुजरते समय के साथ
अहसास भी गुजर गए
ज़िन्दगी के रंगमंच पर
आज एक नया किरदार उभर कर आया है
जो बेफिक्र है , जो ताज़ा है
जो हिम्मती है, जो निडर है
जो ताक़तवर है, जो दमदार है
जो अति सुन्दर है , जो तृप्त है...
Tuesday, January 26, 2016
दासी
तेरे चरणों की दासी हूँ
करो कृपा हे प्रभू
तेरे दरस की प्यासी हूँ
"मैं" ना रहा अब कुछ नहीं शेष
तेरी कृपा से प्रभू
दासी ने पाया गुरु नरेश
राम नाम ही अौषध है
तेरा सुमीरन हे प्रभू
अात्मा का पोषण है
वाटिका का तू सुन्दर फूल
तेरा हर अादेश प्रभू
सर आँख पर है क़ुबूल
नाम ख़ुमारी चढ़े दिन रैन
प्रभू तेरे दर्शन को
तरसे मेरे दोनों नैन
राम रस से सदा रहूँ लिप्त
कृपािनधान प्रभू
यही चाहे दासी तृप्त
Thursday, November 19, 2015
पिया मिलन का चाव
Wednesday, March 6, 2013
अरमाँ
पर कहीं गहरे अंतस में
तीव्र उदासी भी है
नाच उठा है तन बदन
पर कही ख्वाबों की गली में
अखंड ठेहराव भी है
आशाओं से भर गया है मन
पर कहीं किसी धमनी में
अजीब सा खालीपन भी है
भानू की रोशनी से भरपूर है गगन
पर कहीं किसी कोने में
स्याह अँधेरा भी है
वर्षा की बूंदों से धरा है मगन
पर कही किसी कूचे में
बंजर सूखापन भी है
खुशियों ने थाम लिया है दामन
पर कहीं किसी रिश्ते में
नासूर गम के बादल भी हैं
शायद इसी का नाम ज़िन्दगी है
हा इसी का नाम ज़िन्दगी है
नजाने क्यों
नजाने क्यों, सब को सब कुछ पाने की होड़ लगी है नजाने क्यों, सब को सबसे आगे निकलने की होड़ लगी है जो मिल गया है, उसको अनदेखा कर दिया है और जो...
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सर्दियों की मखमली धूप से भी ज्यादा कोमल है तेरी यादों का स्पर्श तेरे साथ बीता मेरा हर पल, मादक है कहतें है मदहोशी की बातें ज़हन में नहीं ...
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चले आए हैं तेरे दर पे कि आज जाने कि जल्दी नहीं किसी कि नजरों का इंतज़ार बनें कि आज हमारे घर कोई नहीं हैं भटक राहों में दर बदर रहें कि ...
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यादों कि डालियों पे ख़्वाबों ने जज्बादों के धरौंदों पर अनगिनत लम्हों का सुंदर आशिआना बना रखा है दिल के आँगन में अरमानो के मनमोहक खिलखि...