Skip to main content

तब्बसुम-ऐ-यार

यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने
जज्बादों के धरौंदों पर
अनगिनत लम्हों का
सुंदर आशिआना बना रखा है
दिल के आँगन में
अरमानो के मनमोहक
खिलखिलाते फूलों से सजी
हसरतों कि डोली में बैठी
उम्मीदों कि नई  नवेली दुल्हन
दामन में अनेक आरजुओ को समेटे
सपनो के समंदर में
अनमोल पलों को संजोए
लहरों के साथ
डूबती चली जा रही है
नयनो के सावन से बरसती
रिमझिम बौछार में
चित, मौर सा अठखेलियाँ करता
नजाने किस किस देश में
किस किस डगर पर
मस्ती में पंख बिखेरे
आशाओं कि पगडंडियों पर
नृत्य कर
बड़ी ही शिद्दत से
अरमानों का झूला
झूल रहा है
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने...

Comments

वाह वाह - शब्दों के अनूठे संगम से सजी लाजवाब अभिव्यक्ति.
किस किस डगर पर
मस्ती में पंख बिखेरे
आशाओं कि पगडंडियों पर
नृत्य कर
बड़ी ही शिद्दत से
अरमानों का झूला
झूल रहा है
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने...
bahut hi laazwaab rachna hai ,happy holi aapko ,ye rang bhi khoobsurat hai
boletobindas said…
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने...

सही कहा है सबकी यादों की डालियों पर जाने कितने ख्वाब हैं....ये यादें तंग भी बहुत करती हैं..
आपकी कविता में उमंग है.....बरकरार रहे यही दुआ है...

वैसे जाने क्यों एक गाना याद आ गया आपकी कविता पढ़कर ...

फूलों की डोली में तुझको बिठाकर
यादों को तेरी मैं दुल्हन बनाकर
रखूंगा दिल के पास
मत हो जां मेरी उदास
Tripat "Prerna" said…
bahut bahut shukriya :)
SURINDER RATTI said…
Tripat Ji,

Sunder likha hai आशाओं कि पगडंडियों पर
नृत्य कर
बड़ी ही शिद्दत से
अरमानों का झूला
झूल रहा है
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने... Badhai.....
Surinder Ratti
nil said…
Ati sundar.

Im sorry,I'm not good in hindi at all, left it in 6th grade.
But I really love and enjoy reading what you write.
Beautiful. Really :)
MUFLIS said…
kavya-rachnaa sundar hai
mn pr prabhaav chhortee hai...
badhaaee .
Jagruti said…
Hey
this is really nice one..love it..please can you write something on mothers..I would love it..

cheers
आपकी कविता का प्रवाह आनंद दायक है यूँ लगता है कि मन की नाव यादों की नदिया में बही जा रही है.
...बधाई.
टंकण त्रुटी..
धरौन्दों... घरौंदों
Tripat "Prerna" said…
@ Surinder Ratti - shukriya :)
@ nil - no worries m still glad u liked my post :)
@ Muflis - bahut bahut shukriya :)
@ jagruti - thx and off course i will soon write something on mother
@ bechaan Atma - bahut bahut shukriya :) and off course thanks for highlighting the mistakes :)
wahooooo yar its awsome ....!!
Jai HO Mangalmay HO
itni sundar rachna hai ki phir padhne aa gayi .
Tripat "Prerna" said…
@ Vivek - thx a lot :)
@ Jyoti Ji - ye mere aho bhaag .. ye to aapka badappan :)
Lincoln said…
wah kya baat hain , but i found it really fast,,,perhaps if it would had few stops to ponder on , it would have been gr8,,,,

anyways thats my thought and i am a naive in this :)
kshama said…
Aapki duniya is rachanakee bhanti bani rahe!
आशाओं कि पगडंडियों पर
नृत्य कर
बड़ी ही शिद्दत से
अरमानों का झूला
झूल रहा है
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने.
Bahut sundar bhavon kee khoobasurat prastuti.
Tripat "Prerna" said…
@ Linclon - thanks for ur guidance will keep this thing in my mind
@ kshama - shukriya :)
@ hemant - bahut bahut shukriya :)
Beautifully written. :)
shama said…
बड़ी ही शिद्दत से
अरमानों का झूला
झूल रहा है
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने...
Waise to harek shabd sundar hai!
Babli said…
बहुत ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!
Tripat "Prerna" said…
bahut bahut shukriya :)
वह -वह ,बहुत खूब
वह -वह ,बहुत खूब
Reetika said…
naazuk si rachna ..
Tripat "Prerna" said…
@ kavisurendradube - shukriya
@ reetika - jawaab nahi aapki peani nazar ka :)
उपमाओं से सजी इस सुन्दर रचना के लिए बधाई !
RepublicOfChic said…
Damn! Hindi poetry can be so great.. Must try to read more of my mother tongue :)

Poet suggestions?
Tripat "Prerna" said…
@ republic - thanks a lot
sulagna ™ said…
prerna...girl you are really talented...such well written poetry in Hindi
Tripat "Prerna" said…
@ Sulagna - thanks a lot u liked it..m just a beginner :)
sm said…
nice poem
बड़ी ही शिद्दत से
अरमानों का झूला
झूल रहा है
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने...
RepublicOfChic said…
Thanks so much for your recommendation :)
Anya said…
I was there
on that blog ?!?!
Thanks for telling me ....

Have a Happy weekend
(@^.^@)
Ankit said…
Bahut hi khoobsurat !!

m just at loss of words to describe more !!!

I can only say its the best as of now !!

the part I liked the most was
बड़ी ही शिद्दत से
अरमानों का झूला
झूल रहा है
यादों कि डालियों पे
ख़्वाबों ने

Happy blogging and tk cr !!!
वह -वह ,बहुत खूब
मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

Popular posts from this blog

अनुभूति

आज अचानक
कहीं गहरे अंतस में
उसी मंदिर  कि घंटियाँ फिर से बजने लगी हैं
और आरती सुनाई देने लगी है 

जब मैं और मेरी सहेलियाँ
छुट्टी वाले दिन
बड़े ही चाव से बन-ठन के
मंदिर जाया करती थी
हर शाम घंटी बजने का 
इंतज़ार किया करतीं थीं

सच...
आज़ाद परिंदा था मन उन दिनों
जिसकी उड़ान की
कोई सीमा नहीं थी,
कोई निश्चित दिशा नहीं थी

बिल्कुल आज़ाद, बंदिशों रहित,
निर्मल, स्वच्छ आकाश में
उड़ान भरने को सदा तत्पर...
खुले-आम जी भर के जीने वाला
चित...
जिसका कही कोई मुकाबला ही नही था...

लेकिन आज अगर ढूंढने भी निकलूँ,
तो भी नहीं मिलता वो मंदिर
कान मानो तरस रहें हों आरती की आवाज़ को...

सहेलियों के भी धरौंदे टूटते समय न लगा
और कच से टूट कर बिखर गए

अब कोई राहगीर नहीं रहा राह में
और मन....
मन जैसे प्रत्येक क्षण
करहा रहा हो...छटपटा रहा हो...
एक बार फिर से उसी गगन को
चूमने को तरस रहा हो...

मगर अफ़सोस
उडारी भर न सकेगा
इन बंदिशों, बेड़ियों, समाज की खोखली जंजीरों में
बंध कर जो रह गया है

न जी सकेगा, न मर सकेगा
बस यूँ ही
घुट-घुट कर आहें भर कर रह जाएगा...

और इंतज़ार करेगा
एक नई प्रभात का
वाटिका में नई कोपलों के फूटने का
एक सुन्द…

दासी

तेरे चरणों की दासी हूँ
करो कृपा हे प्रभू
तेरे दरस की प्यासी हूँ

"मैं" ना रहा अब कुछ नहीं शेष
तेरी कृपा से प्रभू
दासी ने पाया गुरु नरेश

राम नाम ही अौषध है
तेरा सुमीरन हे प्रभू
अात्मा का पोषण है

वाटिका का तू सुन्दर फूल
तेरा हर अादेश प्रभू
सर आँख पर है क़ुबूल

नाम ख़ुमारी चढ़े दिन रैन
प्रभू तेरे दर्शन को
तरसे मेरे दोनों नैन

राम रस से सदा रहूँ लिप्त
कृपािनधान प्रभू
यही चाहे दासी तृप्त

सिसकते रिश्ते

काश की ऐसा हो पाता
कि शाखों से टूटे पत्ते
फिर से उन्ही टहनियों पर
लहरा पाते
काश की ऐसा होता
कि  टूटे हुए तारे
फिर से विशाल आकाश में
जगमगा पाते
काश की ऐसा होता
कि रिश्तों के टूटे हुए तार
फिर से अपने सांचे में ढल पाते
खिलखिला पाते
काश....
मगर ये हो न पाएगा
वक़्त का पहिया तो चलता ही
चला जाएगा
और अच्छा है की न  हो पाएगा
गुजरते समय के साथ
अहसास भी गुजर गए
ज़िन्दगी के रंगमंच पर
आज एक नया किरदार उभर कर आया है
जो बेफिक्र है , जो ताज़ा है
जो हिम्मती है, जो निडर है
जो ताक़तवर है, जो दमदार है
जो अति सुन्दर है , जो तृप्त है...