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Showing posts from January, 2009

अर्जी

कही भी ले जा रब्बा तेरी मर्जी,
बस अपनी याद बनाए रखना यही है अर्जी।
हर शकले- सूरत में तुझको ही देखूं,
बरसें मेघ तेरे प्रेम के यही दुआ मांगू।
रहू हर पल 'तर' तेरे नूर की मय में,
है यही आरजू न कभी आऊं होश में।
तू देख ले इक नज़र तो हो जाऊँ ''तृप्त'',
कर चुकीं हूँ समर्पित ख़ुद को तेरे दरबार में।

सैलाब

चक्की के दो पाटो में पिस कर रह गया हू
यह रास्ता जाने कहा ले जाएगा।
न जाने कहा जा कर रुकेगा ये आंसुओं का सैलाब
थमेगा भी या नही कौन देख पाएगा।

बस एक कदम.....

आकाश, पंछी, बादल, दरिया, पर्वत, हवा; हम इन्हे कुदरत केहेतें है, वो कुदरत जो परम पिता परमत्मा ने अपने हाथों से बनाई और सवारी भी है। हम सब इसकी सरहाना करतें है। हम सब इसे सवार कर संजो कर रखना चाहतें है और कही न कही इसे संभाल कर रखने की पूरी कोशिश भी करतें है।
इंसान को भी तो उसी परमात्मा ने बनाया है, फिर क्यों हम इंसान होते हुए भी उसी इंसान के अस्तित्व को मिटाना चाहतें है? फिर आज क्यों इक इंसान दूसरे का दुश्मन बना बैठा है? क्यों कोई किसी की तरक्की नही देख सकता ? कहा , और कब जा कर टूटे गी ये नफरत की दीवार, वो दीवार जो बिल्कुल खोखली होते हुए भी अपनी नींव पर मजबूती से खड़ी है। आज ये दीवार इतनी विशाल हो गई है की इसने इंसान की आँखों में अपनी काली परछाई छोड़ दी है और वो अपने भले और बुरे के बारे में भी सही निर्णय नही ले पा रहा है। आज हर गली मोड़ पर कोई न कोई किसी न किसी का दुश्मन है। में पूछती हूँ कहा गई वो जिम्मेवारी जिसके लिए परमात्मा ने इंसान की रचना की है? दूसरे का भला करना तो दूर आज इंसान ख़ुद को भी भूल चुका है। तेजी से आगे बड़ते हुए ज़माने की बढती हुई जरूरतों ने इंसान को इतना घेर लिया है …

Ambiguity

It really hurts when you find, that you are absolutely unable to give happiness and satisfaction to those people who loves you and in return you also adore them. But you can't help it, because what nature wants you to do, you are doing the same and the worst part is this that your loved ones don't want you to do it.

Then, What to do, How to react, How to tackle such situations?

It is really a big question mark.

I mean you are not at all going in a wrong direction, you know that you are on the right track and somehow, somewhere they also know that you are not wrong. Only the circumstances are reflecting the negative picture or else I can say that you don't want to see and show the real picture.
I think the negative point is this that, you do not accept the situations. You want everything according to your needs and priorities. Things hurt when you do not take things, the way they really are. The moment you start accepting things, the situations become easier for you and you wil…

A Tribute

I love, when you talk about me
as, it feels that I am worth being with you.

I love, when you walk with me
as, it feels that I am going in a right direction.

I love, when you ask me to do things for you
as, it feels that I can perform things in a better way.

I love, when you eat with me
as, it feels that I am having Great God's blessings with me.

I love, when you take my name in front of 100 people
as, it feels that I am special among them.


-- Thanks for being with me today and always --