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Showing posts from July, 2010

दिले-बयाँ

नैन चक्षुओं को खुलना सिखा मौला, ज़र्रे-ज़र्रे में तेरे अक्स को देखना सिखा मौला
कर्णों से सुनना सिखा मौला, कौने -कौने में तेरे नाम कि अपार चर्चा सुनना सिखा मौला
नथनों से सूंघना सिखा मौला, सृष्टि के कण-कण में बसी तेरी मदमस्त सुगंधी में डूबना सिखा मौला
कंठ को तेरी उस्तत करना सिखा मौला, हर लफ़्ज में तेरा ज़िक्र हो ऐसा कोई नायाब गीत सिखा मौला
हस्त से लिखना सिखा मौला, कविता के प्रत्येक शब्द में तेरे नाम का गुण-गान करना सिखा मौला
उदर कि क्षुदा को तड़पना सिखा मौला, तेरे ध्यान कि ऊर्जा से भूखे पेट को भरना सिखा मौला
क़दमों को चलना सिखा मौला, सकल द्वार को छोड़ कर तेरे नूरे-द्वार पर रुकना सिखा मौला
कामिनी को ख़सम होना सिखा मौला, जन्म-मरण के चक्रव्यूह से अब तो विश्राम करना सिखा मौला