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"राहें"

आज ज़िन्दगी किस राह पर
ले जा रही है
जो कभी सोचा ना था
वो करवा रही है
और जो सोचा था
उसका तो
नामो निशाँ ही नही है
सावन भी बरस कर चल दिया
और कलि पर भी
पूरा यौवन आ गया
कायनात ने अपना नियम
अदा कर दिया
लेकिन
मेरा रास्ता क्यों बदल दिया
जो नही कर सकती थी
वो भी करवा दिया
और भरपूर करवाया की
शिकायत भी करने की
गुंजाइश न रही
ये "उसकी" कृपा थी
या
मेरा करम
की अपने "नसीब" से
मुझे "इशक" करवा दिया

Comments

vandana said…
waah ..........kya baat hai.
ये "उसकी" कृपा थी
या
मेरा करम
की अपने "नसीब" से
मुझे "इशक" करवा दिया ...
bahut badhiya... really..
मेरा रास्ता क्यों बदल दिया
जो नही कर सकती थी
वो भी करवा दिया
और भरपूर करवाया की
शिकायत भी करने की
गुंजाइश न रही
ये "उसकी" कृपा थी
या
मेरा करम
की अपने "नसीब" से
मुझे "इशक" करवा दिया

achchi lagi. badhaai.
Harkirat Haqeer said…
ये "उसकी" कृपा थी
या
मेरा करम
की अपने "नसीब" से
मुझे "इशक" करवा दिया

aap isi tarah naseeb se isq karte aage badhte rahen yahi kamna hai....!!
Dr. Tripat said…
aap yu hi mera honsla badatte rahiye...dhanywaad!!!

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दासी

तेरे चरणों की दासी हूँ
करो कृपा हे प्रभू
तेरे दरस की प्यासी हूँ

"मैं" ना रहा अब कुछ नहीं शेष
तेरी कृपा से प्रभू
दासी ने पाया गुरु नरेश

राम नाम ही अौषध है
तेरा सुमीरन हे प्रभू
अात्मा का पोषण है

वाटिका का तू सुन्दर फूल
तेरा हर अादेश प्रभू
सर आँख पर है क़ुबूल

नाम ख़ुमारी चढ़े दिन रैन
प्रभू तेरे दर्शन को
तरसे मेरे दोनों नैन

राम रस से सदा रहूँ लिप्त
कृपािनधान प्रभू
यही चाहे दासी तृप्त

अरमाँ

खुश हुआ है बहुत अंतर्मन
पर कहीं गहरे अंतस में
तीव्र उदासी भी है
नाच उठा है तन बदन
पर कही ख्वाबों की गली में
अखंड ठेहराव भी है
आशाओं से भर गया है मन
पर कहीं किसी धमनी में
अजीब सा खालीपन भी है
भानू की रोशनी से भरपूर है गगन
पर कहीं किसी कोने में
स्याह अँधेरा भी है
वर्षा की बूंदों से धरा है मगन
पर कही किसी कूचे में
बंजर सूखापन भी है
खुशियों ने थाम लिया है दामन
पर कहीं किसी रिश्ते में
नासूर गम के बादल भी हैं
शायद  इसी का नाम ज़िन्दगी है
हा इसी का नाम ज़िन्दगी है


A Tribute

I love, when you talk about me
as, it feels that I am worth being with you.

I love, when you walk with me
as, it feels that I am going in a right direction.

I love, when you ask me to do things for you
as, it feels that I can perform things in a better way.

I love, when you eat with me
as, it feels that I am having Great God's blessings with me.

I love, when you take my name in front of 100 people
as, it feels that I am special among them.


-- Thanks for being with me today and always --